vrinda - Stories, Read and Download free PDF

त्रिशा... - 38

by vrinda
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राजन ने उन लोगो के पास जाकर आदर से त्रिशा के पापा और मामा को नमस्ते कहा। उन्होनें भी ...

त्रिशा... - 37

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अगली सुबह का सूरज त्रिशा और राजन के लिए एक नई उम्मीदों के साथ आया है। कल की रात ...

त्रिशा... - 36

by vrinda
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राजन ने जब खाने का निवाला यूं चेहरे पर मुस्कान और आंखों में प्यार के साथ त्रिशा की ओर ...

त्रिशा... - 35

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बीती रात की यादों के सजीव होते ही त्रिशा के मन में कड़वाहट भर गई। वह खुद के लिए ...

त्रिशा... - 34

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त्रिशा अपने ही अंदर गूंज रही और आपस में एक दूसरे से लड़ रही उन दोनों आवाजों को सुन ...

त्रिशा... - 33

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उस भयावाह रात के बाद जब अगली बार जब त्रिशा की आंख खुली तो उसने खुद को अपने बिस्तर ...

त्रिशा... - 32

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राजन का मन जैसे कर रहा था वो वैसे त्रिशा को इधर उधर धक्का दे रहा था। उसे मार ...

त्रिशा... - 31

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"क्या????????ऐसे टुकुर टुकुर क्या देख रही है मेरी तरफ?????" राजन ने त्रिशा को अपनी ओर देखने के बाद कहा।पर ...

त्रिशा... - 30

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  • 1k

"क्या कहा रे तूने????????अब तू मुझे बताएगी कि मुझे क्या बोलना है और क्या नहीं बोलना ??????""मेरी मर्जी, मेरा ...

त्रिशा... - 29

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बहुत समय तक राजन का इंतजार कर कर के थक चुकी त्रिशा ने प्लेट में रखी पूड़ी सब्जी खानी ...