part -3सुहानी मोबाइल को देखे जा रही थी।स्क्रीन पर वही शब्द रुके हुए थे—“Harsh is typing…”उसने एक पल ...
PART–2सुहानी को घर पहुँचते ही एहसास हुआ कि कुछ छूट गया है।बैग खोला।डायरी थी।चाबियाँ थीं।मोबाइल था।लेकिन चार्जर नहीं ...
पार्ट - 1सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था।शहर की यह शाम ...
भाग – 13 last partलेकिन समाजअब भी बाहर खड़ा था।माँ ने पूछा—“फैसला कर लिया?”सृष्टि ने जवाब दिया—“हाँ। मां जी ...
भाग – 12गाँव की मिट्टीआज सृष्टि के पैरों कोपहले जैसी नहीं लगी।न डर था,न अपनापन—बस एक ठोस सच्चाई।अंकित उसके ...
भाग – 11रात बहुत भारी थी।ऐसी रात, जिसमें नींद आँखों से नहींसोचों से भाग जाती है।सृष्टि खिड़की के पास ...
भाग – 10शाम का समय था।सृष्टि की सिलाई मशीन आज कुछ ज़्यादा देर तक चलती रही।काम अब बढ़ने लगा ...
भाग – 9स्टेशन पर उतरते ही सृष्टि ने गहरी साँस ली।वही शहर,वही सड़कें,लेकिन अब उसकी चाल में झिझक नहीं ...
भाग – 8बस की खिड़की से बाहर भागती सड़कसृष्टि की आँखों के अंदर भी भाग रही थी।नया शहर।नई जगह।और ...
भाग – 7जब बदनामी ने दरवाज़ा खटखटायासमाज जब हारने लगता है,तो वह सच से नहीं,बदनामी से हमला करता है।अगली ...