VIRENDER VEER MEHTA - Stories, Read and Download free PDF

ब्रह्मवाक्य

by VIRENDER VEER MEHTA
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न जाने कौन सा क्षण था वह; जब मंदिर में पंडितजी की सुनी हुई एक बात, ब्रह्मवाक्य बनकर मेरे ...

माँ दुर्गा के नौ शक्ति स्वरूप

by VIRENDER VEER MEHTA
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भले ही कुछ अति प्रगतिशील लोगों की दृष्टि में धर्म और उससे जुड़ी कुछ मान्यताएं एक अंधविश्वास हैं, लेकिन ...

'शालीमार' का रिक्रिएशन. . . (एक विचार)

by VIRENDER VEER MEHTA
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शालिमारहाल ही के कुछ वर्षों में कई ऐसी फिल्मों का निर्माण हुआ है, जिनमें या तो किसी पुरानी हिट ...

समीक्षा - कहानी संग्रह, सुर्ख़ लाल रंग

by VIRENDER VEER MEHTA
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जीवन के ठोस धरातल से जन्म लेती कहानियाँ. . . 'सुर्ख़ लाल रंग'साहित्य की विधाओं में कहानी विधा एक ...

वह सब जो मैंने कहा

by VIRENDER VEER MEHTA
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आज 'लोकल' में भीड़ नहीं थी। ऐसा कम ही होता है, मेरे आस पास भी केवल तीन लोग ही ...

जीवन में दस्तक देता सिनेमा

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जीवन में दस्तक देता सिनेमा ...

बोलते शब्दों में “लिखी हुयी इबारत”

by VIRENDER VEER MEHTA
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साहित्य के क्षेत्र में यदि लघुकथा के संदर्भ में बात की जाए तो हाल ही के कुछ वर्षों में ...

'राम का जीवन या जीवन में राम' - एक अवलोकन

by VIRENDER VEER MEHTA
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राम का जीवन या जीवन में राम – अनघा जोगलेकर (एक संक्षिप्त अवलोकन ) ...

बिटिया! बदल गई तुम

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बिटिया! बदल गई तुम मेरी प्यारी बिटिया, ढेरों प्रेम भरा स्नेह और आशीर्वाद। जानता हूँ अपने मेल बॉक्स में ...

न जानें क्यों

by VIRENDER VEER MEHTA
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न जानें क्यों "प्रा जी अगर कोई प्रोब्लम न होवे तां, तुस्सी विंडो वाली सीट मैनूं दे सकदे हो।" ...