अहमदाबाद प्रतुल मोतवाणी के शहर वाले घर के बाहर गहमागहमी थी। महँगी गाड़ियाँ एक के बाद एक आ रही ...
शाम ढल चुकी थी। पाँच सितारा होटल के बाहर रोशनी अभी भी तेज़ थी—काँच के दरवाज़ों से छनकर फुटपाथ ...
सुबह के सात बजे। अहमदाबाद के पॉश इलाके में फैला हुआ मोतवाणी हाउस— ऊँची दीवारें। इलेक्ट्रॉनिक गेट। अंदर लंबा ...
नील बिस्तर पर बैठा था। सामने आईना रखा था। चेहरे के लाल धब्बे अब गहरे पड़ चुके थे। बायाँ ...
अपने आलिशान पेंटहाउस के बाहर वे दोनों खड़े थे। ऊँची काँच की दीवारों वाली वह इमारत दूर से ही ...
रेस से दो हफ्ते बाद नील एक इमारत के सबसे ऊपरी माले पर, छज्जे के किनारे पर खड़ा था। ...
ट्रैक साँस रोके हुए था। सुपरकार वर्ल्ड चैंपियनशिप की आख़िरी रेस—जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं। एरीना ...
बारात का आगमन ज़ोर-शोर से हुआ। घोड़ों की टापें, आतिशबाज़ी, और नाचते हुए लोग। करण घोड़ी पर आया—सिर पर ...
कमरा छोटा था। दीवारों पर शीशे नहीं—सिर्फ़ एक बड़ा आईना, जिस पर गुलाबी परदा आधा गिरा था। बाहर भजन ...
प्रदेश के किनारे का एक छोटा-सा गाँव। कमरा भारी था। दीये जल रहे थे, पर उजाला नहीं था। मिट्टी ...