सुनहरी रोशनी धीरे-धीरे गायब हो चुकी थी। जंगल फिर से शांत था। रितांश अब लगभग पूरी तरह ठीक हो ...
तीन दिन आख़िरकार गुज़र ही गए। वे तीन दिन जो श्रेया के लिए सिर्फ़ समय नहीं बल्कि ख़ामोश ज़हर ...
चौहान हवेली – रात का समयलिविंग रूम –घर के सभी लोग अपने-अपने कमरों में जा चुके थे। सिर्फ लिविंग ...
(रात का गहरा सन्नाटा… चारों ओर बस पेड़ों की सरसराहट, चाँद की हल्की रौशनी, और झींगुरों की आवाज़ें। सिमरन ...
राक्षसों ने एक-दूसरे की तरफ देखा...और फिर एक साथ झपट पड़े।बोला -देवकन्या को पकड़ो!आज बचने मत देना!पूरा जंगल उनकी ...
श्रेया अब और दर्द नहीं सह पा रही थी। पेट की ऐंठनऐसी थी मानो कोई अंदर से तोड़ रहा ...
हवेली का कमरा। बाहर अँधेरी रात है। लाल परदों से छनकर आती चाँदनी कमरे को और भी रहस्यमयी बना ...
बीहड़ जंगल के अंदर कदम रखते ही...सब कुछ बदल गया। पेड़ इतने घने थे कि चाँदनी तक ज़मीन पर ...
उस रात श्रेया बहुत ज़्यादा थकी हुई थी। इतनी थकी हुई कि शरीर से ज़्यादा उसका मन जवाब दे ...
(रात का अँधेरा हवेली में फैला है। तभी बिजली कड़कती है और तेज़ आवाज होती है। सिमरन डर के ...