पंद्रह मिनट बाद चौहान हवेली का दरवाज़ा खुला। संयोगिता तेज़ी से अंदर आई। उसके आते ही विवान की नजर ...
(सूरज की हल्की धूप कमरे में फैल रही है। सिया धीरे-धीरे आँखें खोलती है। उसका चेहरा मासूम और शांत ...
कुछ दिनों बाद करण अपना काम खत्म करके घर वापस आ गया…घर में फिर से वही हलचल और अपनापन ...
(रात का सन्नाटा पूरे घर को घेर चुका है। खिड़की से चाँद की फीकी रौशनी कमरे में गिर रही ...
चौहान कंपनी में दोपहर का समय था। संयोगिता अपने केबिन में बैठी काम कर रही थी। उसके सामने कई ...
अगले दिन बेबी सिटर आ गई थी…घर का काम थोड़ा आसान हो गया था।दिन भर की भागदौड़ और ऑफिस ...
(कहानी अब भावनाओं और रहस्यों की गहराई में उतर चुकी थी।कबीर यानी करण अब दो दुनिया के बीच फँसा ...
तभी अचानक कमरे से शिवांश के रोने की आवाज़ आने लगी…हल्की-सी नींद टूटने जैसी आवाज़ थी, लेकिन धीरे-धीरे वह ...
(सांझ का समय। आसमान में हल्का सूरज डूब रहा है।सुनहरी रोशनी मंदिर की सीढ़ियों पर बिखरी हुई है।मंदिर के ...
दिन बीतते जा रहे थे…घर में अब बच्चे की मौजूदगी ने सब कुछ बदल दिया था। वो छोटा सा ...