सादत खान एक देहाती इंसान थे। अपने उसूलों के पक्के, जो बात उनकी जबान से निकल जाती वो पत्थर ...
चलती ट्रेन पकड़ने के चक्कर में वो अपने बैग के साथ बड़ी जोर से गिरी थी। बैठते हुए लायबा ...
"मां बहुत भूख बहुत लगी है.... जल्दी खाना लगाओ" राज ने कोट सोफे पर डालते हुए कहा। लेकिन मां ...
"देखो रानो अब निखिल को तुम्हे ही संभालना है और ये कैसे होगा ये तुम्हें सोचना है" प्रमिला अपनी ...
"नहीं मां....मुझे राहुल से शादी नहीं करनी....आप उन लोगों को इनकार कर दो""तू पागल हुई है क्या.... इतना अच्छा ...
गर्म रेत पर चलते चलते मेरे पैरों में छाले पड़ने लगे थे। लेकिन मैं रुक भी नहीं सकती थी ...
दिल्ली की सड़को पर घूमते घूमते मेरे पैर दुख गये थे और मुझे भूख का भी एहसास हो रहा ...