वह शाम मुंबई का स्टेशन... भीड़ से भरा, आवाज़ों से गूंजता हुआ। लेकिन उस दिन की शाम कुछ अलग थी। ...
सावन का महीना था और आसमान बादलों से ढँका हुआ। हल्की बूँदाबाँदी शहर की सड़कों पर एक सुकूनभरी धुन ...
कभी-कभी एक अनजानी सी टक्कर, एक किताब की गिरी हुई आवाज… और एक नम मौसम, हमारी ज़िंदगी का रुख ...
जयपुर का बस स्टॉप शाम को और भी गुलाबी लगता है। हवा में गुलाब जल की महक है, और ...