अपने पिता से सारे रिश्ते तोड़कर , उन्हें अकेला छोड़कर विदेश चला गया था?जिसने मुड़कर कभी सुजॉय का हाल ...
लंदन के इस भव्य 'देवपुर मेंशन' में जहाँ एक तरफ करण सिंह की अय्याशियाँ और पार्टियाँ चरम पर थीं, ...
हवेली में अब एक अजीब सी शांति थी, लेकिन यह शांति कल रात जैसी डरावनी नहीं थी, बल्कि एक ...
उसे अब अपने अस्तित्व की परवाह नहीं थी; उसे बस उस मुक्ति को रोकना था जो उसके प्रतिशोध को ...
सोहन के हाथ आर्यमन के कंधे से ढीले पड़ गए। नीलम भाभी के चेहरे पर अब एक विजयी मुस्कान ...
त्रिशूल और गंगाजल के स्पर्श ने कालूत्रिशूल और गंगाजल के स्पर्श ने कालू के भीतर के राक्षस को मार ...
कहते हैं, समय का चक्र बहुत तेज़ी से घूमता है। वह किसी राजा के लिए नहीं रुकता, किसी रंक ...
मजूमदार विलामजूमदार विला का अब किसी युद्ध के मैदान जैसा लग रहा था। यह एक आलीशान बंगला था, लेकिन ...
आदित्य की खुशी का ठिकाना नहीं था। बरसों पुराना यार, जिसने जवानी के दिनों में कंधे से कंधा मिलाकर ...
लच्छू की रूह के आजाद होते ही पूरी हवेली में एक ऐसा भयंकर तूफान उठा जैसे धरती फट जाने ...