अध्याय 8 : केस क्लोज... या असली खेल की शुरुआत?शाम का समय था। विशाखापत्तनम पुलिस मुख्यालय के एसपी कार्यालय ...
अध्याय 7 : एक थाना, एक राज, एक बलिदानविशाखापत्तनम की सुबह हमेशा की तरह शांत थी, लेकिन एसपी प्रिया ...
अध्याय 6 : रिश्तों की गर्मी और दुश्मनों की सर्दीसुबह का समय था। एसपी ऑफिस में हमेशा की तरह ...
अध्याय 5 : धड़कनों की दस्तकजहाँ ड्यूटी और दिल के बीच की दीवारें दरकने लगती हैं...सुबह का समय था। ...
अध्याय 4 : शुरुआत से पहले तूफ़ानसुबह की हल्की धूप कमरे में उतर चुकी थी, लेकिन पियू अब भी ...
अध्याय 3 : एक रात, कई सवालसुबह की पहली किरण जैसे ही राजपूताना भवन की ऊँची खिड़कियों से भीतर ...
अध्याय 2 : टकराव की दस्तकशाम अपनी पूरी रौनक पर थी। आलीशान होटल का भव्य हॉल सुनहरी रोशनी से ...
एपिसोड 5 — “जिसने श्राप दिया… वो तुम ही थी”हवा… थम गई थी।पूरा हॉल…अजीब सी खामोशी में डूबा हुआ ...
एपिसोड 4 — “दरवाज़े के उस पार”धड़ाम!!!दरवाज़ा अर्विका के पीछे बंद हो गया।पूरी तरह अंधेरा।इतना गहरा…कि उसे अपने हाथ ...
Chapter 1: एक सगाई... प्रस्तावनाहर गांव की अपनी एक पहचान होती है…कोई अपनी सादगी के लिए जाना जाता है, ...