हैलो फ्रेंड्स ! मैं हूँ विधि आहूजा! ओह ! अच्छा तो आप ये सोच रहे हैं कि मैं आखिर ...
करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ...................शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे के आखिरी दिन एक विचित्र घटना ...
कुछ दिन पहले सहसा मृत्यु ने इस कहानी की सबसे निर्मल, सबसे भोली और सबसे सुकुमार पात्र ' रोहिणी ...
अंधेरी रात थी ... सब ओर नीरवता छाई थी ... रात के अशुभ पक्षी चीत्कार कर रहे थे ... ...
कुछ दिनों में ही वीर सिंह का हाल भयावह हो गया था ... आॅंखें खुन सरीखी लाल ... कांपती ...
कुछ दिन बाद कुछ लकड़हारे उसी घाटी में लकड़ियाँ काटने गए। वहाँ उनकी नजर जमीन से निकले हुए हाथ ...
अमावस की घनघोर काली अॅंधेरी रात थी, रोहिणी ने इस रात को चुना हवेली से भागने के लिए ... ...
जैसे - जैसे रोहिणी के रूप - लावण्य का जादू टूटने लगा वैसे - वैसे हसीन रूमानी रातों का ...
यह कहानी बहुत समय पहले की है ... करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले की ......................................नेपाल के ...
यह घटना लगभग बारह साल पहले 2012 की है, तब सब ओर नवरात्रि की धूमधाम थी। महज़ पन्द्रह साल ...