Kapil Tiwari - Stories, Read and Download free PDF

आश्रम की रामकथा

by Kapil Tiwari

मैं ऋषिकेश की सड़कों पर भटक ही रहा था कि अचानक मेरी नज़र एक पोस्टर पर पड़ी और उसे ...

अधूरी कॉल

by Kapil Tiwari
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मैं बैठा कुछ सोच ही रहा था कि तभी मेरे पीछे रखे मोबाइल से एक जानी-पहचानी सी आवाज़ सुनाई ...

लोकधर्म की कहानियाँ

by Kapil Tiwari
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आज दोपहर मैं ऋषिकेश के एक लोकधार्मिक प्रतिष्ठित मंदिर में बैठा था। वहाँ बैठे-बैठे मुझे हर थोड़ी देर में ...

योगनगरी ऋषिकेश

by Kapil Tiwari
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'योगनगरी ऋषिकेश'—यह एक ऐसा नाम है, जिसे शायद ही किसी ने न सुना हो। इस नाम के चर्चा में ...

चांदनी

by Kapil Tiwari
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यह चांदनी है।सुबह का समय था। गंगा के किनारे, ऋषिकेश में मैं कुछ पढ़ रहा था। तभी सामने से ...

सफेद झूठ और सुनहरे सपने

by Kapil Tiwari
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हम सपरिवार खेत पर काम कर रहे थे। मन के भीतर एक दबी हुई खुशी थी कि मैंने 'नवीं' ...

व्रत और उपवास

by Kapil Tiwari
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“व्रत” और “उपवास” ये शब्द आपने कई बार सुने होगे क्या आप इनका वास्तविक अर्थ जानते है?व्रत का अर्थ ...

14235: जिज्ञासा और जाति

by Kapil Tiwari
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“सफ़र अक्सर हमें मंजिलों से नहीं, सवालों से मिलाते हैं। ट्रेन की ऊपरी बर्थ पर बैठा वह ग्यारह साल ...