कमल चोपड़ा - Stories, Read and Download free PDF

इज्जत के साख

by कमल चोपड़ा

​इज्जत के साथकमल चोपड़ा​इतनी दिक्कत उसे जेल से गाँव तक अकेले पहुँचने में नहीं महसूस हुई थी, जितनी गाँव ...

ऋण

by कमल चोपड़ा
  • 330

​ऋणकमल चोपड़ा​उसने जानबूझकर दीदी के घर जाने के लिए ऐसा ही वक्त चुना था, जबकि जीजाजी और बच्चे घर ...

मुजरिम

by कमल चोपड़ा
  • 297

​मुजरिमकमल चोपड़ा​शोर-शराबा तो ऐसे मचा था जैसे कोई जीता-जागता आतंक गाँव में घुस आया हो, अपना-अपना काम वहीं छोड़कर ...

टूटा-सा कोई दरवाजा

by कमल चोपड़ा
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​टूटा-सा कोई दरवाजा​रात काफी हो गयी थी। आसपास की झुग्गियों से खड़कते हुए बरतनों, बिलबिलाते हुए बच्चों, कलपती हुई ...

बॉंस-फूस-खपच्ची

by कमल चोपड़ा
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​बाँस-फूस-खपच्चीकमल चोपड़ा​झुग्गी के अन्दर जगह कम थी। वे कुल चार जने थे। तीन अन्दर घुस आये थे। एक बाहर ...

संक्रमण

by कमल चोपड़ा
  • 603

संक्रमणकमल चोपड़ा ​आज कालू वहीं काम पर बैठा था, जिसे ना करने के लिए उसकी माँ ने मरते ...

मुद्दा

by कमल चोपड़ा
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​मुद्दाकमल चोपड़ा ​इससे गिरी हुई हरकत और क्या होगी? बेटी की उम्र की बच्ची के साथ रँगे हाथों वह ...

आड़

by कमल चोपड़ा
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​आड़ कमल चोपड़ा ​कई दिनों से असद ने न तो गायत्री को ही चराई के लिए भेजा था ...

देश के हम सिपाही

by कमल चोपड़ा
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​देश के हम सिपाही कमल चोपड़ा​ माँ कह रही थी, “तुम तीन दिन घर से ही मत ...

देश है तो हम हैं

by कमल चोपड़ा
  • 1.9k

​ देश है तो हम हैंकमल चोपड़ा ​अगले दिन वे दीदी से मिले और दीदी को सारी ...