Sagar Joshi - Stories, Read and Download free PDF

PLATFORM - 10

by V R

अध्याय 10: जागने के बाद“इस बार तुम्हें खुद को बचाना है।”अंगद उस दूसरे अंगद को देखता रहा।बारिश उसके चेहरे ...

PLATFORM - 9

by V R
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अध्याय 9: आख़िरी सफ़रअस्पताल की खिड़की के बाहर बारिश हो रही थी।अंगद ICU के बाहर खड़ा था।काँच के उस ...

PLATFORM - 8

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अध्याय 8: कोमा के भीतरधड़… धड़… धड़…ट्रेन के पहियों की आवाज़ अंधेरे अस्पताल में गूँज रही थी।अंगद बिल्कुल स्थिर ...

PLATFORM - 7

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अध्याय 7: दस साल की नींदट्रेन चल रही थी।लेकिन अंगद के लिए समय रुक चुका था।वह अपनी सीट पर ...

PLATFORM - 6

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अध्याय 6: वह रातउस रात अंगद घर नहीं गया।वह स्टेशन के बाहर लगी एक लोहे की बेंच पर बैठा ...

PLATFORM - 5

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अध्याय 5: दस साल पुरानी रातकागज़ अब भी अंगद की उँगलियों के बीच था।16 अगस्त 2016।वही तारीख।दस साल पुरानी।उसने ...

PLATFORM - 4

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अध्याय 4: समय के खिलाफअंगद की आँखें खुली थीं।लेकिन उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।डिब्बे की पीली रोशनी ...

PLATFORM - 3

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---Chapter 3: फँसा हुआरात के 11:51।---प्लेटफ़ॉर्म पर वही हल्की गूंज।Announcements दूर से आ रही थीं…पर साफ नहीं।जैसे कोई आवाज़ ...

PLATFORM - 2

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Chapter 2: वही रात… फिर सेरात के 11:52।घड़ी की सुई जैसे अटक गई हो।---प्लेटफ़ॉर्म पर ट्यूब लाइट झपक रही ...

PLATFORM - 1

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Chapter 1: आख़िरी लोकलरात के 11:52।ट्रेन छूटने ही वाली थी।अंगद दौड़ते हुए प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँचा।फोन कंधे और कान के ...