लखनऊ से जब आप कस्बापुर की ओर आते हैं,तो कस्बापुर शुरू होते ही अनुसूया रोड पड़ती है— खूब चौड़ी ...
“हैप्पी बर्थडे,” सुबह सात बजे बहन ने मुझे मोबाइल किया था, “अपने स्कूल से मैं सीधे तुम्हारे पास पहुंच ...
मेरा गणित का पर्चा अच्छा हुआ था. पर्चा देते ही मैं बाबूजी की दुकान पर आ गया. ...
सन उन्नीस सौ उनसठ के उस दिन किशोर अपने पैतृक गांव से लौटा था।जहां वह दसवीं की अपनी परीक्षा ...
आपदधर्म “चरण- स्पर्श, ताऊजी,” बाहर के बरामदे से बहू की ...
“मां ने बैंंक में अपना खाता कब खोला?” मां की स्मृतियों में से एक नई कड़ी मैं ने खोलनी ...
“आप को प्रिंसीपल साहिबा ने याद किया है,मैडम,” कस्बापुर के राजकीय महिला डिग्री कालेज का एक चपरासी रमा के ...
“धर्मवीर,” अपनी अर्द्धचेतना में जाई मुझे ठीक पहचान न पाईं। समझीं, मैं यशवीर नहीं हूं। धर्मवीर हूं। ...
“मैं सिनेमा जा रही हूं,”गली के नुक्कड़ पर उस बुद्धवार जैसे ही मां अपने झोलों के साथ प्रकट हुईं,अपनी ...
कहानी: दीपक शर्मा “मेरी ट्विट अपनी पूरी उड़ान नहीं भर रही। ...