रात के ग्यारह बज चुके थे। घर के सब लोग सो गए थे। समर्थ अपने छोटे से कमरे में ...
दोपहर के तीन बज रहे थे। जून की इस चुभती हुई गर्मी में ऐसा लग रहा था मानो आसमान ...